सुप्रीम कोर्ट ने हत्या के एक मामले में बंद आरोपी को बरी कर दिया।
सुप्रीम कोर्ट ने हत्या के एक मामले में दोषी ठहराए गए एक व्यक्ति को बरी किया। कोर्ट ने फैसला सुनाया कि कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) को सबूत के तौर पर तब तक नहीं माना जा सकता, जब तक उनके साथ भारतीय साक्ष्य अधिनियम (Indian Evidence Act) की धारा 65-B के तहत अनिवार्य सर्टिफिकेट न हो। जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस एनवी अंजारिया की बेंच ने कहा, "...साक्ष्य अधिनियम की धारा 65-B [BSA की धारा 63] के तहत सर्टिफिकेट को अभियोजन पक्ष साबित नहीं कर पाया। साक्ष्य अधिनियम की धारा 65-B [BSA की धारा 63] के तहत अनिवार्य रूप से ज़रूरी सर्टिफिकेट के अभाव में कॉल डिटेल रिकॉर्ड सबूत के तौर पर अमान्य हो जाते हैं और अभियोजन पक्ष के मामले का समर्थन करने के लिए उन पर भरोसा नहीं किया जा सकता।" इसके टिप्पणी के साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान हाईकोर्ट का वह फैसला रद्द किया, जिसमें दोषसिद्धि बरकरार रखी गई थी। यह मामला 2010 में एक महिला की हत्या से जुड़ा है। अभियोजन पक्ष ने आरोप लगाया कि पीड़िता के पति ने इस अपराध को अंजाम देने के लिए अपीलकर्ता के साथ साज़िश रची थी। इस कथित साज़िश को साबित ...