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SRH का तूफान: 226 रन बनाकर KKR को 65 रन से रौंदा

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📰 SRH की विस्फोटक बल्लेबाज़ी और दमदार गेंदबाज़ी से KKR पर 65 रन की बड़ी जीत, Klaasen और Head रहे जीत के हीरो कल खेले गए एक हाई-स्कोरिंग मुकाबले में सनराइजर्स हैदराबाद (SRH) ने शानदार ऑलराउंड प्रदर्शन करते हुए कोलकाता नाइट राइडर्स (KKR) को 65 रन से करारी शिकस्त दी। यह मैच पूरी तरह से SRH के नाम रहा, जिसमें उनकी बल्लेबाजी, रणनीति और गेंदबाजी—तीनों ने मिलकर KKR को मुकाबले से बाहर कर दिया। 226 रन का विशाल स्कोर खड़ा करने के बाद SRH के गेंदबाजों ने अनुशासित प्रदर्शन करते हुए KKR को लक्ष्य से काफी दूर रोक दिया। आक्रामक शुरुआत ने तय कर दी मैच की दिशा टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने उतरी SRH की टीम ने शुरुआत से ही अपने इरादे साफ कर दिए थे। Travis Head और Abhishek Sharma की ओपनिंग जोड़ी ने पावरप्ले में ही मैच का रुख बदल दिया। दोनों बल्लेबाजों ने बिना किसी डर के आक्रामक शॉट्स खेले और KKR के गेंदबाजों पर लगातार दबाव बनाए रखा। Travis Head ने अपनी पारी में शानदार टाइमिंग और आक्रामकता का प्रदर्शन किया। उन्होंने 21 गेंदों में 46 रन बनाते हुए KKR के गेंदबाजों की लाइन-लेंथ बिगाड़ दी। उनकी पारी म...

अपील और पुनरीक्षण में संशोधन पर CPC आदेश VI नियम 17 की सख्ती नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट का महत्वपूर्ण निर्णय”**

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🏛️ इलाहाबाद हाईकोर्ट का महत्वपूर्ण फैसला: अपील और पुनरीक्षण में CPC आदेश VI निय म 17 की सख्त बाध्यता नहीं इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण निर्णय देते हुए स्पष्ट किया है कि सिविल प्रक्रिया संहिता (CPC) के आदेश VI नियम 17 का वह प्रावधान, जो ट्रायल शुरू होने के बाद pleadings में संशोधन पर रोक लगाता है, अपील और पुनरीक्षण (revision) कार्यवाही में उसी कठोरता से लागू नहीं किया जा सकता। यह निर्णय जस्टिस योगेन्द्र कुमार श्रीवास्तव की एकल पीठ द्वारा दिया गया, जिसमें कानून के व्यावहारिक और न्यायसंगत उपयोग पर जोर दिया गया। --- ### 📌 क्या है आदेश VI नियम 17 का उद्देश्य? अदालत ने अपने फैसले में कहा कि आदेश VI नियम 17 का मूल उद्देश्य सिविल मुकदमों (trial) में pleadings के संशोधन को नियंत्रित करना है। विशेष रूप से यह सुनिश्चित करने के लिए कि जब एक बार ट्रायल शुरू हो जाए और साक्ष्य रिकॉर्ड होने लगें, तब देर से किए गए संशोधन न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित न करें और अनावश्यक देरी न हो। लेकिन कोर्ट ने स्पष्ट किया कि इस प्रावधान को अपील या पुनरीक्षण कार्यवाही में **यांत्रिक (mechanical...

इलाहाबाद हाईकोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: अब मृत या असमर्थ सरकारी कर्मचारी के कानूनी वारिस भी कर सकेंगे

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**इलाहाबाद हाईकोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: अब मृत या असमर्थ सरकारी कर्मचारी के कानूनी वारिस भी कर सकेंगे चिकित्सा प्रतिपूर्ति का दावा, नियम 16 की उदार व्याख्या से परिवारों को बड़ी राहत** इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण और दूरगामी प्रभाव वाले फैसले में उत्तर प्रदेश सरकारी सेवक (चिकित्सा उपस्थिति) नियम, 2011 के नियम 16 की व्याख्या को व्यापक बनाते हुए यह स्पष्ट किया है कि अब किसी मृत या असमर्थ सरकारी कर्मचारी के कानूनी वारिस भी चिकित्सा प्रतिपूर्ति (रिइम्बर्समेंट) का दावा कर सकेंगे। न्यायमूर्ति आलोक माथुर और न्यायमूर्ति अमिताभ कुमार राय की खंडपीठ ने इस मामले में “रीड डाउन” के सिद्धांत को अपनाते हुए कहा कि नियम 16 को इस प्रकार पढ़ा जाना चाहिए कि यदि मूल लाभार्थी (बेनेफिशियरी) की मृत्यु हो जाती है या वह दावा करने में असमर्थ हो जाता है, तो उसके कानूनी वारिसों को यह अधिकार मिलना चाहिए। अदालत ने अपने फैसले में यह महत्वपूर्ण टिप्पणी की कि वर्तमान नियम ऐसी परिस्थितियों को ध्यान में नहीं रखता, जहां इलाज के दौरान ही लाभार्थी की मृत्यु हो जाए। ऐसे मामलों में परिवार को लाभ से वंचित करना न केवल अन्...

सुप्रीम कोर्ट ने हत्या के एक मामले में बंद आरोपी को बरी कर दिया।

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सुप्रीम कोर्ट ने हत्या के एक मामले में दोषी ठहराए गए एक व्यक्ति को बरी किया। कोर्ट ने फैसला सुनाया कि कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) को सबूत के तौर पर तब तक नहीं माना जा सकता, जब तक उनके साथ भारतीय साक्ष्य अधिनियम (Indian Evidence Act) की धारा 65-B के तहत अनिवार्य सर्टिफिकेट न हो। जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस एनवी अंजारिया की बेंच ने कहा, "...साक्ष्य अधिनियम की धारा 65-B [BSA की धारा 63] के तहत सर्टिफिकेट को अभियोजन पक्ष साबित नहीं कर पाया। साक्ष्य अधिनियम की धारा 65-B [BSA की धारा 63] के तहत अनिवार्य रूप से ज़रूरी सर्टिफिकेट के अभाव में कॉल डिटेल रिकॉर्ड सबूत के तौर पर अमान्य हो जाते हैं और अभियोजन पक्ष के मामले का समर्थन करने के लिए उन पर भरोसा नहीं किया जा सकता।" इसके टिप्पणी के साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान हाईकोर्ट का वह फैसला रद्द किया, जिसमें दोषसिद्धि बरकरार रखी गई थी। यह मामला 2010 में एक महिला की हत्या से जुड़ा है। अभियोजन पक्ष ने आरोप लगाया कि पीड़िता के पति ने इस अपराध को अंजाम देने के लिए अपीलकर्ता के साथ साज़िश रची थी। इस कथित साज़िश को साबित ...

पत्नी की हत्या के दोषी पति को उम्रकैद, 50 हजार का जुर्माना।

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पत्नी की हत्या के दोषी पति को उम्रकैद, 50 हजार का जुर्माना। अजय सिंह *न्याय अभी जिंन्दा है,कातिल पति अब शर्मिंन्दा है!* फतेहपुर। जिले में गुरुवार को अपर एवं सत्र न्यायालय फास्ट ट्रैक कोर्ट न०2 अजय सिंह के द्वारा पत्नी के हत्यारोपी पति को उम्रकैद की सजा सुनाई गई है। साथ ही 50 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया है। अपर सत्र न्यायाधीश/एफटीसी-2 फतेहपुर की अदालत ने आज सुनवाई करते हुए पत्नी की हत्या के मामले में दोषी पाए गए पति को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही 50 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया है। बता दें कि धाता थाना क्षेत्र में विगत 28 दिसंबर 2017 को घटना हुई थी। थाना क्षेत्र के ग्राम कोला निवासी रामेश्वर निषाद के पुत्र बट्टी निषाद ने अपनी पत्नी संगीता की शादी के कुछ समय बाद उस पर शक करते हुए गला दबाकर हत्या कर दी थी। घटना के बाद उसने इसे आत्महत्या का रूप देने की कोशिश की थी, लेकिन पुलिस की जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट में हत्या की पुष्टि हुई। मामले में पुलिस ने जांच कर आरोपी के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की। अदालत में सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने पर्याप्त साक्ष्य और गवाह पेश ...

जज की पत्नी उषा चौहान की ट्रेन में हुई मौत।

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मध्य प्रदेश के रतलाम के जाबरा रेलवे स्टेशन पर बुधवार को एक महिला यात्री की ट्रेन के टॉयलेट में शव मिलता है बताया जा रहा है कि महिला के पति जज है जब ओ रेलवे स्टेशन से नीचे उतरे तो उन्हें उनकी पत्नी कही नजर नही आई पत्नी के न मिलने पर उन्होंने स्टेशन पर काफी तलाश की लेकिन उन्हें उनकी पत्नी कही नजर नहीं आई। दरअसल मध्य प्रदेश के रतलाम जिले से एक हैरान कर देने वाली और बेहद दुखद घटना सामने आई। रेलवे स्टेशन पर एक चलती ट्रेन के टॉयलेट से महिला यात्री का शव मिलने से हड़कंप मच गया। शुरआती जांच के मुताबिक महिला के पति राजस्थान के चितौड़गढ़ में पदस्य एक जज हैं। यह घटना उस वक्त सामने आई जब पति ट्रेन से नई है उतर गए और पत्नी प्लेटफॉर्म पे कही नजर ही नही आई। जानकारी के मुताबिक महिला की पहचान उषा चौहान के रुप में हुई है जिसकी उम्र क़रीब 45 से 50 वर्ष के आसपास बताईं जा रही हैं वो अपने पति चितौड़गढ़ मे पदस्थ ADJ राजकुमार चौहान के साथ 4 मार्च को कांचीगुडा भगत की कोठी एक्सप्रेस में सफर कर रही थी दोनों का ट्रेन में अलग अलग रिजर्वेशन था और वह राजस्थान के सोयत स्टेशन से सवार हुई थी बुधवार सुबह जब ट्रेन चितौड़ग...

जज कैसे बने। जज बनने के लिए क्या करे। जज बनने के लिए क्या आवश्यक है। भारत मे जज कौन बन सकता है?

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👨‍⚖️अगर आप जज बनना हो तो कैसे बनें सम्पूर्ण जानकारी आप के लिए जज बनने के लिए आपको कानून (विधि)Law की पढ़ाई करनी होती है और फिर न्यायिक सेवा परीक्षा (Judiciary Exam) पास करनी होती है। इसके लिए आल को सबसे पहले……….. 📚 1️⃣ 12वीं के बाद क्या करें?🔹 विकल्प 1: 5 साल का इंटीग्रेटेड लॉ कोर्स12वीं के बाद सीधे BA LLB / BBA LLB / B.Com LLB अवधि: 5 साल 🔹 विकल्प 2: ग्रेजुएशन के बाद 3 साल का LLBपहले किसी भी विषय से ग्रेजुएशन फिर 3 साल का LLB 📌 पढ़ाई के लिए आप हिसाब से किसी अच्छे संस्थानों में एडमिशन ले सकते हैं: National Law University Faculty of Law Delhi University ⚖️ 2️⃣ LLB के बाद क्या करें?LLB पूरी करने के बाद आपके पास दो मुख्य रास्ते होते हैं: 🔹 (A) सीधे सिविल जज बनना (न्यायिक सेवा परीक्षा के माध्यम से)इसे PCS(J) / Judicial Services Exam भी कहते हैं। 🔹 (B) वकील बनकर अनुभव लेने के बाद जज बननाकुछ राज्यों में अनुभव जरूरी होता है (3–7 साल तक की प्रैक्टिस)। 📝 3️⃣ न्यायिक सेवा परीक्षा (Judiciary Exam) कैसे होती है?हर राज्य अपनी अलग परीक्षा कराता है, जैसे: Uttar Pradesh Public Ser...