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लखनऊ हाईकोर्ट की बड़ी टिप्पणी: अस्थायी व वर्कचार्ज कर्मचारियों को पुरानी पेंशन देने के आदेश पर अंतरिम रोक, 27 अप्रैल को होगी अहम सुनवाई

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** लखनऊ हाईकोर्ट की बड़ी टिप्पणी: अस्थायी व वर्कचार्ज कर्मचारियों को पुरानी पेंशन देने के आदेश पर अंतरिम रोक, 27 अप्रैल को होगी अहम सुनवाई* * लखनऊ हाईकोर्ट की खंडपीठ ने राज्य सरकार को महत्वपूर्ण राहत देते हुए अस्थायी और वर्कचार्ज कर्मचारियों को पुरानी पेंशन योजना (OPS) का लाभ देने संबंधी एकल पीठ के आदेश पर फिलहाल अंतरिम रोक लगा दी है। न्यायालय ने इस मामले की अगली सुनवाई के लिए 27 अप्रैल की तिथि निर्धारित की है, जिस दिन इस मुद्दे पर विस्तृत और अंतिम सुनवाई की जाएगी। यह आदेश न्यायमूर्ति राजन रॉय और न्यायमूर्ति एके चौधरी की खंडपीठ ने पारित किया। खंडपीठ ने यह फैसला लोक निर्माण विभाग ( PWD ) की ओर से दाखिल की गई 40 विशेष अपीलों पर एक साथ सुनवाई करते हुए दिया। राज्य सरकार ने इन अपीलों के माध्यम से एकल पीठ के 4 नवंबर 2025 के फैसले को चुनौती दी थी। एकल पीठ ने अपने आदेश में कहा था कि अस्थायी और वर्कचार्ज कर्मचारियों की पूरी सेवा अवधि को जोड़कर उन्हें पुरानी पेंशन योजना का लाभ दिया जाए, भले ही उनकी नियमित नियुक्ति 1 अप्रैल 2005 के बाद हुई हो। इस निर्णय से बड़ी संख्या में कर्मचारियों...

अपील और पुनरीक्षण में संशोधन पर CPC आदेश VI नियम 17 की सख्ती नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट का महत्वपूर्ण निर्णय”**

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🏛️ इलाहाबाद हाईकोर्ट का महत्वपूर्ण फैसला: अपील और पुनरीक्षण में CPC आदेश VI निय म 17 की सख्त बाध्यता नहीं इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण निर्णय देते हुए स्पष्ट किया है कि सिविल प्रक्रिया संहिता (CPC) के आदेश VI नियम 17 का वह प्रावधान, जो ट्रायल शुरू होने के बाद pleadings में संशोधन पर रोक लगाता है, अपील और पुनरीक्षण (revision) कार्यवाही में उसी कठोरता से लागू नहीं किया जा सकता। यह निर्णय जस्टिस योगेन्द्र कुमार श्रीवास्तव की एकल पीठ द्वारा दिया गया, जिसमें कानून के व्यावहारिक और न्यायसंगत उपयोग पर जोर दिया गया। --- ### 📌 क्या है आदेश VI नियम 17 का उद्देश्य? अदालत ने अपने फैसले में कहा कि आदेश VI नियम 17 का मूल उद्देश्य सिविल मुकदमों (trial) में pleadings के संशोधन को नियंत्रित करना है। विशेष रूप से यह सुनिश्चित करने के लिए कि जब एक बार ट्रायल शुरू हो जाए और साक्ष्य रिकॉर्ड होने लगें, तब देर से किए गए संशोधन न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित न करें और अनावश्यक देरी न हो। लेकिन कोर्ट ने स्पष्ट किया कि इस प्रावधान को अपील या पुनरीक्षण कार्यवाही में **यांत्रिक (mechanical...

सुप्रीम कोर्ट ने हत्या के एक मामले में बंद आरोपी को बरी कर दिया।

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सुप्रीम कोर्ट ने हत्या के एक मामले में दोषी ठहराए गए एक व्यक्ति को बरी किया। कोर्ट ने फैसला सुनाया कि कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) को सबूत के तौर पर तब तक नहीं माना जा सकता, जब तक उनके साथ भारतीय साक्ष्य अधिनियम (Indian Evidence Act) की धारा 65-B के तहत अनिवार्य सर्टिफिकेट न हो। जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस एनवी अंजारिया की बेंच ने कहा, "...साक्ष्य अधिनियम की धारा 65-B [BSA की धारा 63] के तहत सर्टिफिकेट को अभियोजन पक्ष साबित नहीं कर पाया। साक्ष्य अधिनियम की धारा 65-B [BSA की धारा 63] के तहत अनिवार्य रूप से ज़रूरी सर्टिफिकेट के अभाव में कॉल डिटेल रिकॉर्ड सबूत के तौर पर अमान्य हो जाते हैं और अभियोजन पक्ष के मामले का समर्थन करने के लिए उन पर भरोसा नहीं किया जा सकता।" इसके टिप्पणी के साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान हाईकोर्ट का वह फैसला रद्द किया, जिसमें दोषसिद्धि बरकरार रखी गई थी। यह मामला 2010 में एक महिला की हत्या से जुड़ा है। अभियोजन पक्ष ने आरोप लगाया कि पीड़िता के पति ने इस अपराध को अंजाम देने के लिए अपीलकर्ता के साथ साज़िश रची थी। इस कथित साज़िश को साबित ...

जज की पत्नी उषा चौहान की ट्रेन में हुई मौत।

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मध्य प्रदेश के रतलाम के जाबरा रेलवे स्टेशन पर बुधवार को एक महिला यात्री की ट्रेन के टॉयलेट में शव मिलता है बताया जा रहा है कि महिला के पति जज है जब ओ रेलवे स्टेशन से नीचे उतरे तो उन्हें उनकी पत्नी कही नजर नही आई पत्नी के न मिलने पर उन्होंने स्टेशन पर काफी तलाश की लेकिन उन्हें उनकी पत्नी कही नजर नहीं आई। दरअसल मध्य प्रदेश के रतलाम जिले से एक हैरान कर देने वाली और बेहद दुखद घटना सामने आई। रेलवे स्टेशन पर एक चलती ट्रेन के टॉयलेट से महिला यात्री का शव मिलने से हड़कंप मच गया। शुरआती जांच के मुताबिक महिला के पति राजस्थान के चितौड़गढ़ में पदस्य एक जज हैं। यह घटना उस वक्त सामने आई जब पति ट्रेन से नई है उतर गए और पत्नी प्लेटफॉर्म पे कही नजर ही नही आई। जानकारी के मुताबिक महिला की पहचान उषा चौहान के रुप में हुई है जिसकी उम्र क़रीब 45 से 50 वर्ष के आसपास बताईं जा रही हैं वो अपने पति चितौड़गढ़ मे पदस्थ ADJ राजकुमार चौहान के साथ 4 मार्च को कांचीगुडा भगत की कोठी एक्सप्रेस में सफर कर रही थी दोनों का ट्रेन में अलग अलग रिजर्वेशन था और वह राजस्थान के सोयत स्टेशन से सवार हुई थी बुधवार सुबह जब ट्रेन चितौड़ग...

जज कैसे बने। जज बनने के लिए क्या करे। जज बनने के लिए क्या आवश्यक है। भारत मे जज कौन बन सकता है?

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👨‍⚖️अगर आप जज बनना हो तो कैसे बनें सम्पूर्ण जानकारी आप के लिए जज बनने के लिए आपको कानून (विधि)Law की पढ़ाई करनी होती है और फिर न्यायिक सेवा परीक्षा (Judiciary Exam) पास करनी होती है। इसके लिए आल को सबसे पहले……….. 📚 1️⃣ 12वीं के बाद क्या करें?🔹 विकल्प 1: 5 साल का इंटीग्रेटेड लॉ कोर्स12वीं के बाद सीधे BA LLB / BBA LLB / B.Com LLB अवधि: 5 साल 🔹 विकल्प 2: ग्रेजुएशन के बाद 3 साल का LLBपहले किसी भी विषय से ग्रेजुएशन फिर 3 साल का LLB 📌 पढ़ाई के लिए आप हिसाब से किसी अच्छे संस्थानों में एडमिशन ले सकते हैं: National Law University Faculty of Law Delhi University ⚖️ 2️⃣ LLB के बाद क्या करें?LLB पूरी करने के बाद आपके पास दो मुख्य रास्ते होते हैं: 🔹 (A) सीधे सिविल जज बनना (न्यायिक सेवा परीक्षा के माध्यम से)इसे PCS(J) / Judicial Services Exam भी कहते हैं। 🔹 (B) वकील बनकर अनुभव लेने के बाद जज बननाकुछ राज्यों में अनुभव जरूरी होता है (3–7 साल तक की प्रैक्टिस)। 📝 3️⃣ न्यायिक सेवा परीक्षा (Judiciary Exam) कैसे होती है?हर राज्य अपनी अलग परीक्षा कराता है, जैसे: Uttar Pradesh Public Ser...

ऑल इंडिया बार एग्जामिनेशन (AIBE 20) 2025: संपूर्ण जानकारी हिंदी में

1 . AIBE क्या है? AIBE = All India Bar Examination (ऑल इंडिया बार एग्जामिनेशन)। इसे बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) द्वारा आयोजित किया जाता है। इसका उद्देश्य कानून स्नातकों की योग्यता की जाँच करना है ताकि वे भारत में अदालतों में वकालत कर सकें। यानी, इसे पास करना “Certificate of Practice (CoP)” प्राप्त करने के लिए अनिवार्य है। --- 2. AIBE 20 की अधिसूचना एवं तिथियाँ (प्रारंभिक/अनुमानित) नीचे वे तिथियाँ दी गई हैं जो विभिन्न स्रोतों ने अनुमानित की हैं: घटना अनुमानित / घोषित तिथि अधिसूचना जारी होने की संभावना सितंबर 2025 पंजीकरण आरंभ 29 सितंबर 2025 पंजीकरण की अंतिम तिथि 28 अक्टूबर 2025 आवेदन सुधार (Correction) 31 अक्टूबर 2025 एडमिट कार्ड जारी 15 नवंबर 2025 परीक्षा तिथि 30 नवंबर 2025 (कुछ स्रोतों में यह तिथि सुझाई गई है) परिणाम / उत्तर कुंजी परीक्षा के बाद प्रकाशित होगी (अभी निश्चित नहीं) > ध्यान दें: कुछ स्रोतों ने दिसंबर 2025 की तारीखों का अनुमान भी लगाया है (जैसे 21 या 22 दिसंबर) पूरी और आधिकारिक तिथियाँ BCI द्वारा जारी अधिसूचना में ही सुनिश्चित होंगी। --- 3. प...

क्या उत्तर प्रदेश के इस ज़िले का बदल दिया जाएगा ? क्या इसके लिए प्रस्ताव भी भेजा दिया गया है?

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क्या उत्तर प्रदेश के इस ज़िले का बदल दिया जाएगा ? क्या इसके लिए प्रस्ताव भी भेजा दिया गया है? उत्तर प्रदेश में कई जिलों का नामो में परिवर्तन करने के लिए प्रदेश सरकार इस दिशा में भी बेहतर प्रयास कर रही है प्रदेश सरकार जिले के विकास के लिए कई योजनाओं का भी उल्लेख भी कर रही है. जिससे जिले को गौरवशाली इतिहास को भी सम्मान मिल पाएगा प्रदेश सरकार को भेजा गया प्रस्ताव उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ जिले में पर्यटन स्थलों के नाम बदलने के कारण यह जिला हमेशा आगे ही रहा है. प्रदेश में प्रसिद्ध अलीगढ़ शहर नाम को लेकर इधर काफी दिनों से सुर्खियों में समा बाधा है. अब इधर कुछ दिनों से अलीगढ़ शहर का नाम बदलने के लिए मांग की अपील की जा रही है अब इसके लिए शहर की जिला पंचायत अध्यक्ष श्योराज राज सिंह ने राज्य के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से भी मुलाकात की है. मिली जानकारी के अनुसार बताया गया है कि अलीगढ़ शहर का नाम बदलकर हरिगढ़ रखने का प्रस्ताव तैयार किया गया है इसको लेकर उन्होंने खुद विशेष जानकारी से अवगत कराया गया है. आगे अध्यक्ष ने कहा है कि एएनआई से बातचीत करते हुए बताया है कि मैंने कुछ दिन पहले म...

FIR (First Information Report) – प्रथम सूचना रिपोर्ट सम्पूर्ण जानकारी हिंदी में

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FIR (First Information Report) – प्रथम सूचना रिपोर्ट सम्पूर्ण जानकारी हिंदी में --- 🔷 FIR क्या होती है? FIR (First Information Report) एक लिखित दस्तावेज़ होता है, जिसे पुलिस द्वारा तब दर्ज किया जाता है जब किसी संज्ञेय अपराध (Cognizable Offence) की जानकारी उन्हें सबसे पहले दी जाती है। यह दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC), 1973 की धारा 154 के अंतर्गत आता है। --- 🔷 FIR दर्ज करने का उद्देश्य अपराध की सबसे पहली सूचना को रिकॉर्ड करना। पुलिस को कानूनी रूप से कार्रवाई करने का आधार देना। अदालत में मुकदमे की शुरुआत के लिए आधार तैयार करना। --- 🔷 FIR दर्ज करने के लिए आवश्यक बातें 1. FIR केवल संज्ञेय अपराध (Cognizable Offences) के लिए दर्ज की जाती है (जैसे हत्या, बलात्कार, अपहरण, चोरी आदि)। 2. यह पीड़ित, गवाह, या कोई अन्य व्यक्ति (जिसे घटना की जानकारी हो) द्वारा दर्ज करवाई जा सकती है। 3. FIR पुलिस स्टेशन में जाकर मौखिक या लिखित रूप में दर्ज करवाई जा सकती है। 4. मौखिक सूचना को पुलिस अधिकारी लिखता है और पढ़कर सुनाता है। 5. शिकायतकर्ता का हस्ताक्षर आवश्यक होता है। 6. FIR की एक ...

यूपी के अमेठी जिले के गौरीगंज क्षेत्र में उप-जिलाधिकारी (SDM) प्रीति तिवारी और उनकी राजस्व टीम सरकारी जमीन से अवैध कब्जा हटाने गई थीं। लेकिन भूमि माफिया और अवैध कब्जेदारों ने उन पर हमला बोल दिया

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यूपी के अमेठी जिले के गौरीगंज क्षेत्र में उप-जिलाधिकारी (SDM) प्रीति तिवारी और उनकी राजस्व टीम सरकारी जमीन से अवैध कब्जा हटाने गई थीं। लेकिन भूमि माफिया और अवैध कब्जेदारों ने उन पर हमला बोल दिया, पथराव किया, ट्रैक्टर-ट्रकों को छुड़ा लिया और उन्हें सुनियोजित रूप से दौड़ा-दौड़ाकर घायल किया । मुख्य घटनाक्रम: यह घटना माधवपुर गांव (गौरीगंज तहसील) में हुई, जहाँ जमीन पर टिन शेड लगाकर कब्जा किया गया था । जब राजस्व टीम ने कब्जा हटाने की कार्रवाई शुरू की, तो स्थानीय दबंगों ने सड़क रोक दी, SDM और कर्मचारियों पर पथराव और धक्का‑मुक्की की, वाहन क्षतिग्रस्त किये, और उन्हें वाहन से जबरन उतारा भी गया । इस हमले में नायब तहसीलदार अनुश्री, लेखपाल सिराज समेत कई कर्मी घायल हुए, और शिकायतकर्ता भोलानाथ सिंह को भी चोटें आईं । पुलिस ने तुरंत स्थिति संभाली, पांच आरोपियों को हिरासत में लिया और मामला दर्ज किया । पार्श्व में मुख्य तथ्य : प्रशासन की प्राथमिकता अवैध खनन और कब्जे पर नकेल कसना है, लेकिन इन घटनाओं से अधिकारियों की सुरक्षा की चुनौतियाँ सामने आती हैं । अमेठी और झांसी जैसे इलाकों में हाल क...

भारतीय संविधान का अनुच्छेद 32 विस्तृत जानकारी

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भारतीय संविधान का अनुच्छेद 32 (Article 32) नागरिकों को मूल अधिकारों की रक्षा के लिए सर्वोच्च न्यायालय में याचिका दाखिल करने का अधिकार प्रदान करता है। इसे "संविधान का हृदय और आत्मा" (Heart and Soul of the Constitution) कहा गया है, जैसा कि डॉ. भीमराव अंबेडकर ने कहा था। 🔷 अनुच्छेद 32 की प्रमुख विशेषताएँ: 1. मूल अधिकारों की रक्षा का अधिकार यदि किसी नागरिक के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन होता है, तो वह सीधे सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर सकता है। 2. सीधे सर्वोच्च न्यायालय में पहुंच यह संविधान का एकमात्र अनुच्छेद है जो नागरिकों को सीधे सुप्रीम कोर्ट जाने का अधिकार देता है। 3 . रिट (Writs) जारी करने की शक्ति सुप्रीम कोर्ट निम्नलिखित पांच रिट जारी कर सकता है: हैबियस कॉर्पस (Habeas Corpus) – अवैध हिरासत से मुक्ति के लिए मैंडेमस (Mandamus) – सार्वजनिक अधिकारी को कर्तव्य पालन हेतु आदेश सर्टियोरारी (Certiorari) – निचली अदालत से केस सुप्रीम कोर्ट में स्थानांतरित करने हेतु प्रोहिबिशन (Prohibition) – निचली अदालत को उसकी सीमा से बाहर जाकर फैसला देने से रोकना क्वो वारंटो (Quo W...

Azamgarh Police Attack: मामूली विवाद सुलझाने पहुंची पुलिस, लोगों ने SHO को घेर कर बुरी तरीके से पीटा

यह वीडियो आज़मगढ़, उत्तर प्रदेश में 5 जून की रात का एक चिंताजनक दृश्य दिखाता है। दिल्ली-आगरा राजमार्ग के पास बरदह थाना क्षेत्र के बर्रा गाँव में, एक मामूली विवाद सुलझाने पहुँची पुलिस बल को गाँव वालों ने घेर लिया। स्थानीय SHO के सिर से खून बह रहा था और भीड़ ने उन पर हमला कर दिया। एसएचओ चीखते हुए कहा: > “ छोड़ दो यार… मैं थानेदार हूँ… जान ले लोगे क्या?” स्थिति सत्ता के उल्लंघन और सामाजिक विघटन की ओर इशारा करती है — जहाँ पुलिस स्वयं विवाद निपटाने पहुँची, लेकिन आम लोगों द्वारा उन्हें घेरा गया और प्रताडित किया गया। जरूरत हो तो घटना की पृष्ठभूमि समझने, पुलिस व सामाजिक प्रतिक्रियाओं या कानूनी निहितार्थों पर सलाह या जानकारी देने में मैं मदद कर सकता हूँ। घटना के अगले चरण में जो स्पष्ट हुआ, उसे संक्षेप में इस प्रकार बताया जा सकता है: --- 🚨 स्थिति की गहराई: 1. मूल तनाव की वजह: यह विवाद तब शुरू हुआ जब 3 जून को अजबमेहर गाँव (बम्भौर, अज़मगढ़) में शादी समारोह के दौरान महिला‑समूह पर वीडियो बनाने वालों द्वारा सेक्सुअल‑हरassment संभवत: शूटिंग की कोशिश की गई थी, जिससे बीच‑बीच में वाद‑विव...

सुप्रीम कोर्ट वक्फ संशोधन अधिनियम 2025 पर स्टे की मांग वाली याचिकाओं पर आज अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है।

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सुप्रीम कोर्ट वक्फ संशोधन अधिनियम 2025 पर स्टे की मांग वाली याचिकाओं पर आज अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। 3 दिनों के लम्बी सुन‌वाई के बाद चीफ जस्टिस ए०जी० मसीह और जस्टिस बी० आर० गवई की अध्यक्षता वाली बेंच ने गुरुवार को सभी पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद आदेश सुरक्षित रखा जो कुछ दिनों में सामने आयेगा। याचिकाकर्ता की ओर से सीनियर एड‌वोकेट कपिल सिब्बल ने अपनी दलील रखी। उन्होंने कहा जैसे-ही किसी सम्पन्ति की वक्फ जाँच शुरू होती है तब तक के लिए उसका वक्फ दर्जा खत्म हो जाता है। 200 साल पुरानी कब्रिस्तान को भी सरकार अब अपनी संपत्ति बना सकती है। इस पर मुख्य न्यायाधीश बी० आर० गवई ने सवाल किया कि यदि जमीन इतनी पुरानी है तो उसका राजिष्ट्रेशन क्यो नही कराया गया। इस पर कपिल सिब्बल ने जबाब में कहा 'कि पंजीकरण राज्य की जिम्मेदारी थी जिसें पूरा नहीं किया गया। अब यह कहना कि समुदाय ने पंजीकरण नहीं कराया और इसलिए उनकी गलती है हो यह तर्क संगत नही है उन्होंने आगे कहा कि यदि आप के पास शक्ति है तो आप अपनी ही गलती का लाभ नहीं उठा सकते। अन्य याचिकाकर्ताओं की और से वरिष्ठ वकील अभिषे...

सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर राष्ट्रपति ने जताई आपत्ति, पूछा- अदालतों के पास इसका अधिकार है?

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सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर राष्ट्रपति ने जताई आपत्ति, पूछा- अदालतों के पास इसका अधिकार है? राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने सुप्रीम कोर्ट के 8 अप्रैल के ऐतिहासिक फैसले पर कड़ी प्रतिक्रिया जताई है, जिसमें राज्यपालों और राष्ट्रपति को विधानसभाओं द्वारा पारित विधेयकों पर निर्णय लेने के लिए समय-सीमा निर्धारित की गई थी। राष्ट्रपति ने इस फैसले को संवैधानिक मूल्यों और व्यवस्थाओं के विपरीत बताया और इसे संवैधानिक सीमाओं का अतिक्रमण करार दिया। संविधान की अनुच्छेद 143 (1) के तहत राष्ट्रपति ने सर्वोच्च न्यायालय से 14 संवैधानिक प्रश्नों पर राय मांगी है। यह प्रावधान बहुत कम उपयोग में आता है, लेकिन केंद्र सरकार और राष्ट्रपति ने इसे इसलिए चुना क्योंकि उन्हें लगता है कि समीक्षा याचिका उसी पीठ के समक्ष जाएगी जिसने मूल निर्णय दिया और सकारात्मक परिणाम की संभावना कम है। सुप्रीम कोर्ट की जिस पीठ ने फैसला सुनाया था उसमें जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और आर. महादेवन भी शामिल थे। सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा था, 'राज्यपाल को किसी विधेयक पर तीन महीने के भीतर निर्णय लेना होगा। इस समय सीमा में या तो स्वीकृति...

वकील को इंटरव्यू के लिए भेजना उसकी गरिमा का हनन': सुप्रीम कोर्ट ने सीनियर डेजिग्नेशन के लिए अंक-आधारित प्रणाली क्यों खत्म की?

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वकील को इंटरव्यू के लिए भेजना उसकी गरिमा का हनन': सुप्रीम कोर्ट ने सीनियर डेजिग्नेशन के लिए अंक-आधारित प्रणाली क्यों खत्म की? सुप्रीम कोर्ट ने माना कि वरिष्ठ वकीलों के पद के लिए 100-बिंदु आधारित मूल्यांकन तंत्र, जो इंदिरा जयसिंह के 2017 और 2023 के निर्णयों (इंदिरा जयसिंह-1 और 2) में स्थापित किया गया था, पिछले साढ़े सात सालों में अपने इच्छित उद्देश्यों को प्राप्त करने में विफल रहा है। जस्टिस अभय ओक, जस्टिस उज्जल भुइयां और जस्टिस एसवीएन भट्टी की पीठ ने कहा - "पिछले साढ़े सात वर्षों के अनुभव से पता चलता है कि अंक आधारित प्रारूप के आधार पर पद के लिए आवेदन करने वाले वकीलों की योग्यता, बार में उनकी स्थिति और कानून में उनके अनुभव आदि का आकलन करना तर्कसंगत या वस्तुनिष्ठ रूप से संभव नहीं हो सकता है। इससे वांछित उद्देश्य प्राप्त नहीं हुआ है।” न्यायालय ने पाया कि इंदिरा जयसिंह के दो निर्णयों में दिए गए उसके निर्देश कभी भी अंतिम नहीं थे, क्योंकि इंदिरा जयसिंह-1 के पैराग्राफ 74 और इंदिरा जयसिंह-2 के पैराग्राफ 51 में उद्धृत अनुभव के आधार पर उपयुक्त संशोधनों का प्रावधान है। न्या...

सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश ने रिटायरमेंट के बाद क्या बोले

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“मैं सेवानिवृत्त के बाद कोई पद स्वीकार नही करूँगा लेकिन शायद कानून के क्षेत्र में कुछ करूँगा।” या शब्द है देश के मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना में जो उन्होंने विदाई के दौरान पत्रकारों से कहा, "उन्होंने ने कहा वे रिटायरमेंट के बाद सरकार की ओर से दिया जाने वाला कोई आधिकारिक पद नही लेंगे" जस्टिस संजीव खन्ना ने मंगलवार13 मई को रिटायर हो गए है। बतौर न्याधीश मंगलवार को उनका अंतिम कार्य दिवस रहा। इस मौके पे उन्होने पुष्टि की कि रिटायरमेंट के बाद कोई आधिकारिक पड़ ग्रहण नही करेंगे जब सुप्रीम कोर्ट मे पत्रकारों से बात कर रहे थे तो उन्होंने इस प्रश्न का उत्तर देते हुए कोई पद ना लेने कज बात कही। जस्टिस खन्ना के इस बयान से स्पष्ट हो गया कि वह किसी अयोग का अध्यक्ष पद या फिर कोई संवैधानिक पद को स्वीकार नहीं करेंगे। लेकिन कानून के क्षेत्र में काम करते रहेंगे हालांकि इस क्षेत्र में उनकी अगली भूमिका क्या होगी और कैसे होगी इस पर उन्होंने कुछ भी स्पष्ट नहीं किया है। उन्होंने फिलहाल इतना संकेत दिया है कि वह ना तो घर बैठेंगे और न ही किसी सरकारी ऑड पर बैठेंगे बल्कि अपनी लम्बी कानूनी यात्रा ...

बाराबंकी में सालार साहू की दरगाह पर नही लगेगा मेला

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बाराबंकी में सालार साहू की दरगाह पर नही लगेगा मेला बहराइच के बाद बाराबंकी में भी सैयद सालार साहू गाजी की दरगाह पर नहीं लगेगा मेला, पुलिस ने परमिशन देने से किया इनका दरअसल, मेला कमेटी ने इस बार 14 और 15 मई को मेले के आयोजन की अनुमति प्रशासन से मांगी थी. प्रशासन ने इसके आयोजन को लेकर पुलिस से स्टेटस रिपोर्ट मांगी थी. पुलिस ने शुरुआती दौर में ही रिपोर्ट भेजकर साफ कर दिया था कि मेले का आयोजन न हो. मेले का आयोजन हुआ तो तमाम संगठनों के विरोध को देखते हुए कानून-व्यवस्था बिगड़ सकती है. यूपी के बहराइच में सैयद सालार मसूद गाजी की दरगाह पर लगने वाले मेले की परमिशन को रद्द करने के बाद अब बाराबंकी में भी सैयद सालार साहू गाजी की दरगाह पर लगने वाला मेला नहीं लगेगा. पुलिस ने तमाम संगठनों के विरोध को देखते हुए कानून-व्यवस्था बिगड़ने की आशंका जताकर मेला रोकने की संस्तुति कर दी है. बाराबंकी के सतरिख में स्थित सैयद सालार साहू गाजी महमूद गजनवी की सेनापति था. बहराइच में जिस सालार मसूद गाजी के मेले पर जिला प्रशासन ने अनुमति नहीं दी उसी के पिता सालार साहू गाजी याद में बाराबंकी के सतरिख में लगने व...

सुप्रीम कोर्ट ने नोएडा टोल ब्रिज कंपनी लिमिटेड की याचिका खारिज की

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Supreme court ने नोएडा टोल ब्रिज कंपनी लिमिटेड की याचिका खारिज की, जिसमें उसने दिल्ली-नोएडा डायरेक्ट (DND) फ्लाईवे पर यात्रियों पर टोल लगाने की याचिका खारिज करने के फैसले की समीक्षा की मांग की थी। सूर्यकांत और जस्टिस उज्जल भुइयां की खंडपीठ ने यह आदेश पारित किया। कोर्ट दो पुनर्विचार याचिकाओं पर विचार कर रहा था, जिनमें से एक NTBCL और दूसरी प्रदीप पुरी ( NTBCL के निदेशकों में से एक) द्वारा दायर की गई थी। हालांकि कोर्ट ने पुरी के रुख को देखते हुए फैसले में कुछ बदलावों पर सहमति जताई, लेकिन NTBCL की चुनौती को पूरी तरह खारिज कर दिया गया। प्रदीप पुरी के वकील पीयूष जोशी ने दलील दी कि CAG रिपोर्ट (जिस पर कोर्ट ने भरोसा किया) में इस बात के कोई निष्कर्ष नहीं थे कि उन्होंने "कुछ नहीं किया"। इस संबंध में न्यायालय के निर्णय के निम्नलिखित अंश की ओर ध्यान आकृष्ट किया गयाः " CAG रिपोर्ट से चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि प्रदीप पुरी (जो सीनियर नौकरशाह प्रतीत होते हैं) सहित NTBCL के निदेशकों ने स्पष्ट रूप से कोई जिम्मेदारी नहीं निभाई, फिर भी उनके सभी खर्च, जिनमें उच्च-स्त...

राष्ट्रपति द्रोपती मुर्मू ने जस्टिस सूर्यकांत को NALSA के एक्जीक्यूटिव चेयरमैन के रूप में नामित किया

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राष्ट्रपति द्रोपती मुर्मू ने जस्टिस सूर्यकांत को NALSA के एक्जीक्यूटिव चेयरमैन के रूप में नामित किया राष्ट्रपति द्रोपती मुर्मू ने सुप्रीम कोर्ट जज जस्टिस सूर्यकांत को 14 मई, 2025 से राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण के कार्यकारी अध्यक्ष (Executive Chairman) के रूप में नामित किया। इस संबंध में विधि एवं न्याय मंत्रालय द्वारा अधिसूचना जारी की गई, जिसमें विधिक सेवा प्राधिकरण अधिनियम, 1987 की धारा 3 (2) (बी) के तहत शक्तियों का प्रयोग करते हुए राष्ट्रपति के नामांकन की घोषणा की गई। परंपरा के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट के दूसरे सीनियर जज को NALSA के एक्जीक्यूटिव चेयरमैन के रूप में नियुक्त किया जाता है। वर्तमान में NALSA के एक्जीक्यूटिव चेयरमैन जस्टिस बीआर गवई 13 मई को चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (सीजेआई) संजीव खन्ना की रिटायरमेंट के बाद 14 मई को सीजेआई के रूप में पदभार ग्रहण करेंगे। वर्तमान में जस्टिस सूर्यकांत सुप्रीम कोर्ट विधिक सेवा समिति के चेयरमैन हैं।

बहराइच दरगाह के जेठ मेले पर रोक मामले में हाईकोर्ट से राहत नहीं

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बहराइच दरगाह के जेठ मेले पर रोक मामले में हाईकोर्ट से राहत नहीं....... विस्तार में देखें. High Court decision on Bahraich fair : लखनऊ Highcourt की Lucknow पीठ से बहराइच में दरगाह शरीफ के लगने वाले जेठ मेले पर रोक मामले में सोमवार को कोई राहत नहीं दी है। मामले की अगली सुनवाई 14 मई को है। Lucknow की लखनऊ पीठ से बहराइच में दरगाह शरीफ के लगने वाले जेठ मेले पर रोक मामले में सोमवार को फिलहाल कोई अंतरिम राहत नहीं मिली है। कोर्ट ने कहा मामले में विपक्षी पक्षकारों का जवाब मांगे जाने तक कोई अंतरिम राहत दिया जाना उचित नहीं होगा। कोर्ट ने राज्य सरकार समेत अन्य पक्षकारों को मामले में जवाब दाखिल करने का समय देकर अगली सुनवाई 14 मई को नियत की है। Justice Rajan Roy और Justice Om Prakash Shukla की खंडपीठ ने यह आदेश बहराइच की दरगाह शरीफ प्रबंध समिति की ओर से इसके चेयरमैन द्वारा दाखिल याचिका पर दिया। याचिका में बहराइच के डी एम के इसी 26 अप्रैल के उस आदेश को चुनौती दी गई थी, जिसमें सैयद सालार मसूद गाजी के दरगाह के पास हर साल लगने वाले जेठ मेले की इस बार अनुमति नहीं दी गई थी। याची ने इसे कानून...