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अपील और पुनरीक्षण में संशोधन पर CPC आदेश VI नियम 17 की सख्ती नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट का महत्वपूर्ण निर्णय”**

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🏛️ इलाहाबाद हाईकोर्ट का महत्वपूर्ण फैसला: अपील और पुनरीक्षण में CPC आदेश VI निय म 17 की सख्त बाध्यता नहीं इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण निर्णय देते हुए स्पष्ट किया है कि सिविल प्रक्रिया संहिता (CPC) के आदेश VI नियम 17 का वह प्रावधान, जो ट्रायल शुरू होने के बाद pleadings में संशोधन पर रोक लगाता है, अपील और पुनरीक्षण (revision) कार्यवाही में उसी कठोरता से लागू नहीं किया जा सकता। यह निर्णय जस्टिस योगेन्द्र कुमार श्रीवास्तव की एकल पीठ द्वारा दिया गया, जिसमें कानून के व्यावहारिक और न्यायसंगत उपयोग पर जोर दिया गया। --- ### 📌 क्या है आदेश VI नियम 17 का उद्देश्य? अदालत ने अपने फैसले में कहा कि आदेश VI नियम 17 का मूल उद्देश्य सिविल मुकदमों (trial) में pleadings के संशोधन को नियंत्रित करना है। विशेष रूप से यह सुनिश्चित करने के लिए कि जब एक बार ट्रायल शुरू हो जाए और साक्ष्य रिकॉर्ड होने लगें, तब देर से किए गए संशोधन न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित न करें और अनावश्यक देरी न हो। लेकिन कोर्ट ने स्पष्ट किया कि इस प्रावधान को अपील या पुनरीक्षण कार्यवाही में **यांत्रिक (mechanical...

इलाहाबाद हाईकोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: अब मृत या असमर्थ सरकारी कर्मचारी के कानूनी वारिस भी कर सकेंगे

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**इलाहाबाद हाईकोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: अब मृत या असमर्थ सरकारी कर्मचारी के कानूनी वारिस भी कर सकेंगे चिकित्सा प्रतिपूर्ति का दावा, नियम 16 की उदार व्याख्या से परिवारों को बड़ी राहत** इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण और दूरगामी प्रभाव वाले फैसले में उत्तर प्रदेश सरकारी सेवक (चिकित्सा उपस्थिति) नियम, 2011 के नियम 16 की व्याख्या को व्यापक बनाते हुए यह स्पष्ट किया है कि अब किसी मृत या असमर्थ सरकारी कर्मचारी के कानूनी वारिस भी चिकित्सा प्रतिपूर्ति (रिइम्बर्समेंट) का दावा कर सकेंगे। न्यायमूर्ति आलोक माथुर और न्यायमूर्ति अमिताभ कुमार राय की खंडपीठ ने इस मामले में “रीड डाउन” के सिद्धांत को अपनाते हुए कहा कि नियम 16 को इस प्रकार पढ़ा जाना चाहिए कि यदि मूल लाभार्थी (बेनेफिशियरी) की मृत्यु हो जाती है या वह दावा करने में असमर्थ हो जाता है, तो उसके कानूनी वारिसों को यह अधिकार मिलना चाहिए। अदालत ने अपने फैसले में यह महत्वपूर्ण टिप्पणी की कि वर्तमान नियम ऐसी परिस्थितियों को ध्यान में नहीं रखता, जहां इलाज के दौरान ही लाभार्थी की मृत्यु हो जाए। ऐसे मामलों में परिवार को लाभ से वंचित करना न केवल अन्...
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