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सुप्रीम कोर्ट वक्फ संशोधन अधिनियम 2025 पर स्टे की मांग वाली याचिकाओं पर आज अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है।

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सुप्रीम कोर्ट वक्फ संशोधन अधिनियम 2025 पर स्टे की मांग वाली याचिकाओं पर आज अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। 3 दिनों के लम्बी सुन‌वाई के बाद चीफ जस्टिस ए०जी० मसीह और जस्टिस बी० आर० गवई की अध्यक्षता वाली बेंच ने गुरुवार को सभी पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद आदेश सुरक्षित रखा जो कुछ दिनों में सामने आयेगा। याचिकाकर्ता की ओर से सीनियर एड‌वोकेट कपिल सिब्बल ने अपनी दलील रखी। उन्होंने कहा जैसे-ही किसी सम्पन्ति की वक्फ जाँच शुरू होती है तब तक के लिए उसका वक्फ दर्जा खत्म हो जाता है। 200 साल पुरानी कब्रिस्तान को भी सरकार अब अपनी संपत्ति बना सकती है। इस पर मुख्य न्यायाधीश बी० आर० गवई ने सवाल किया कि यदि जमीन इतनी पुरानी है तो उसका राजिष्ट्रेशन क्यो नही कराया गया। इस पर कपिल सिब्बल ने जबाब में कहा 'कि पंजीकरण राज्य की जिम्मेदारी थी जिसें पूरा नहीं किया गया। अब यह कहना कि समुदाय ने पंजीकरण नहीं कराया और इसलिए उनकी गलती है हो यह तर्क संगत नही है उन्होंने आगे कहा कि यदि आप के पास शक्ति है तो आप अपनी ही गलती का लाभ नहीं उठा सकते। अन्य याचिकाकर्ताओं की और से वरिष्ठ वकील अभिषे...

सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर राष्ट्रपति ने जताई आपत्ति, पूछा- अदालतों के पास इसका अधिकार है?

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सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर राष्ट्रपति ने जताई आपत्ति, पूछा- अदालतों के पास इसका अधिकार है? राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने सुप्रीम कोर्ट के 8 अप्रैल के ऐतिहासिक फैसले पर कड़ी प्रतिक्रिया जताई है, जिसमें राज्यपालों और राष्ट्रपति को विधानसभाओं द्वारा पारित विधेयकों पर निर्णय लेने के लिए समय-सीमा निर्धारित की गई थी। राष्ट्रपति ने इस फैसले को संवैधानिक मूल्यों और व्यवस्थाओं के विपरीत बताया और इसे संवैधानिक सीमाओं का अतिक्रमण करार दिया। संविधान की अनुच्छेद 143 (1) के तहत राष्ट्रपति ने सर्वोच्च न्यायालय से 14 संवैधानिक प्रश्नों पर राय मांगी है। यह प्रावधान बहुत कम उपयोग में आता है, लेकिन केंद्र सरकार और राष्ट्रपति ने इसे इसलिए चुना क्योंकि उन्हें लगता है कि समीक्षा याचिका उसी पीठ के समक्ष जाएगी जिसने मूल निर्णय दिया और सकारात्मक परिणाम की संभावना कम है। सुप्रीम कोर्ट की जिस पीठ ने फैसला सुनाया था उसमें जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और आर. महादेवन भी शामिल थे। सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा था, 'राज्यपाल को किसी विधेयक पर तीन महीने के भीतर निर्णय लेना होगा। इस समय सीमा में या तो स्वीकृति...

वकील को इंटरव्यू के लिए भेजना उसकी गरिमा का हनन': सुप्रीम कोर्ट ने सीनियर डेजिग्नेशन के लिए अंक-आधारित प्रणाली क्यों खत्म की?

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वकील को इंटरव्यू के लिए भेजना उसकी गरिमा का हनन': सुप्रीम कोर्ट ने सीनियर डेजिग्नेशन के लिए अंक-आधारित प्रणाली क्यों खत्म की? सुप्रीम कोर्ट ने माना कि वरिष्ठ वकीलों के पद के लिए 100-बिंदु आधारित मूल्यांकन तंत्र, जो इंदिरा जयसिंह के 2017 और 2023 के निर्णयों (इंदिरा जयसिंह-1 और 2) में स्थापित किया गया था, पिछले साढ़े सात सालों में अपने इच्छित उद्देश्यों को प्राप्त करने में विफल रहा है। जस्टिस अभय ओक, जस्टिस उज्जल भुइयां और जस्टिस एसवीएन भट्टी की पीठ ने कहा - "पिछले साढ़े सात वर्षों के अनुभव से पता चलता है कि अंक आधारित प्रारूप के आधार पर पद के लिए आवेदन करने वाले वकीलों की योग्यता, बार में उनकी स्थिति और कानून में उनके अनुभव आदि का आकलन करना तर्कसंगत या वस्तुनिष्ठ रूप से संभव नहीं हो सकता है। इससे वांछित उद्देश्य प्राप्त नहीं हुआ है।” न्यायालय ने पाया कि इंदिरा जयसिंह के दो निर्णयों में दिए गए उसके निर्देश कभी भी अंतिम नहीं थे, क्योंकि इंदिरा जयसिंह-1 के पैराग्राफ 74 और इंदिरा जयसिंह-2 के पैराग्राफ 51 में उद्धृत अनुभव के आधार पर उपयुक्त संशोधनों का प्रावधान है। न्या...

सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश ने रिटायरमेंट के बाद क्या बोले

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“मैं सेवानिवृत्त के बाद कोई पद स्वीकार नही करूँगा लेकिन शायद कानून के क्षेत्र में कुछ करूँगा।” या शब्द है देश के मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना में जो उन्होंने विदाई के दौरान पत्रकारों से कहा, "उन्होंने ने कहा वे रिटायरमेंट के बाद सरकार की ओर से दिया जाने वाला कोई आधिकारिक पद नही लेंगे" जस्टिस संजीव खन्ना ने मंगलवार13 मई को रिटायर हो गए है। बतौर न्याधीश मंगलवार को उनका अंतिम कार्य दिवस रहा। इस मौके पे उन्होने पुष्टि की कि रिटायरमेंट के बाद कोई आधिकारिक पड़ ग्रहण नही करेंगे जब सुप्रीम कोर्ट मे पत्रकारों से बात कर रहे थे तो उन्होंने इस प्रश्न का उत्तर देते हुए कोई पद ना लेने कज बात कही। जस्टिस खन्ना के इस बयान से स्पष्ट हो गया कि वह किसी अयोग का अध्यक्ष पद या फिर कोई संवैधानिक पद को स्वीकार नहीं करेंगे। लेकिन कानून के क्षेत्र में काम करते रहेंगे हालांकि इस क्षेत्र में उनकी अगली भूमिका क्या होगी और कैसे होगी इस पर उन्होंने कुछ भी स्पष्ट नहीं किया है। उन्होंने फिलहाल इतना संकेत दिया है कि वह ना तो घर बैठेंगे और न ही किसी सरकारी ऑड पर बैठेंगे बल्कि अपनी लम्बी कानूनी यात्रा ...

बाराबंकी में सालार साहू की दरगाह पर नही लगेगा मेला

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बाराबंकी में सालार साहू की दरगाह पर नही लगेगा मेला बहराइच के बाद बाराबंकी में भी सैयद सालार साहू गाजी की दरगाह पर नहीं लगेगा मेला, पुलिस ने परमिशन देने से किया इनका दरअसल, मेला कमेटी ने इस बार 14 और 15 मई को मेले के आयोजन की अनुमति प्रशासन से मांगी थी. प्रशासन ने इसके आयोजन को लेकर पुलिस से स्टेटस रिपोर्ट मांगी थी. पुलिस ने शुरुआती दौर में ही रिपोर्ट भेजकर साफ कर दिया था कि मेले का आयोजन न हो. मेले का आयोजन हुआ तो तमाम संगठनों के विरोध को देखते हुए कानून-व्यवस्था बिगड़ सकती है. यूपी के बहराइच में सैयद सालार मसूद गाजी की दरगाह पर लगने वाले मेले की परमिशन को रद्द करने के बाद अब बाराबंकी में भी सैयद सालार साहू गाजी की दरगाह पर लगने वाला मेला नहीं लगेगा. पुलिस ने तमाम संगठनों के विरोध को देखते हुए कानून-व्यवस्था बिगड़ने की आशंका जताकर मेला रोकने की संस्तुति कर दी है. बाराबंकी के सतरिख में स्थित सैयद सालार साहू गाजी महमूद गजनवी की सेनापति था. बहराइच में जिस सालार मसूद गाजी के मेले पर जिला प्रशासन ने अनुमति नहीं दी उसी के पिता सालार साहू गाजी याद में बाराबंकी के सतरिख में लगने व...

सुप्रीम कोर्ट ने नोएडा टोल ब्रिज कंपनी लिमिटेड की याचिका खारिज की

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Supreme court ने नोएडा टोल ब्रिज कंपनी लिमिटेड की याचिका खारिज की, जिसमें उसने दिल्ली-नोएडा डायरेक्ट (DND) फ्लाईवे पर यात्रियों पर टोल लगाने की याचिका खारिज करने के फैसले की समीक्षा की मांग की थी। सूर्यकांत और जस्टिस उज्जल भुइयां की खंडपीठ ने यह आदेश पारित किया। कोर्ट दो पुनर्विचार याचिकाओं पर विचार कर रहा था, जिनमें से एक NTBCL और दूसरी प्रदीप पुरी ( NTBCL के निदेशकों में से एक) द्वारा दायर की गई थी। हालांकि कोर्ट ने पुरी के रुख को देखते हुए फैसले में कुछ बदलावों पर सहमति जताई, लेकिन NTBCL की चुनौती को पूरी तरह खारिज कर दिया गया। प्रदीप पुरी के वकील पीयूष जोशी ने दलील दी कि CAG रिपोर्ट (जिस पर कोर्ट ने भरोसा किया) में इस बात के कोई निष्कर्ष नहीं थे कि उन्होंने "कुछ नहीं किया"। इस संबंध में न्यायालय के निर्णय के निम्नलिखित अंश की ओर ध्यान आकृष्ट किया गयाः " CAG रिपोर्ट से चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि प्रदीप पुरी (जो सीनियर नौकरशाह प्रतीत होते हैं) सहित NTBCL के निदेशकों ने स्पष्ट रूप से कोई जिम्मेदारी नहीं निभाई, फिर भी उनके सभी खर्च, जिनमें उच्च-स्त...

राष्ट्रपति द्रोपती मुर्मू ने जस्टिस सूर्यकांत को NALSA के एक्जीक्यूटिव चेयरमैन के रूप में नामित किया

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राष्ट्रपति द्रोपती मुर्मू ने जस्टिस सूर्यकांत को NALSA के एक्जीक्यूटिव चेयरमैन के रूप में नामित किया राष्ट्रपति द्रोपती मुर्मू ने सुप्रीम कोर्ट जज जस्टिस सूर्यकांत को 14 मई, 2025 से राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण के कार्यकारी अध्यक्ष (Executive Chairman) के रूप में नामित किया। इस संबंध में विधि एवं न्याय मंत्रालय द्वारा अधिसूचना जारी की गई, जिसमें विधिक सेवा प्राधिकरण अधिनियम, 1987 की धारा 3 (2) (बी) के तहत शक्तियों का प्रयोग करते हुए राष्ट्रपति के नामांकन की घोषणा की गई। परंपरा के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट के दूसरे सीनियर जज को NALSA के एक्जीक्यूटिव चेयरमैन के रूप में नियुक्त किया जाता है। वर्तमान में NALSA के एक्जीक्यूटिव चेयरमैन जस्टिस बीआर गवई 13 मई को चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (सीजेआई) संजीव खन्ना की रिटायरमेंट के बाद 14 मई को सीजेआई के रूप में पदभार ग्रहण करेंगे। वर्तमान में जस्टिस सूर्यकांत सुप्रीम कोर्ट विधिक सेवा समिति के चेयरमैन हैं।