टॉमी की वफ़ादारी"
कहानी का शीर्षक: " टॉमी की वफ़ादारी" एक छोटे से गाँव में कमला नाम की एक बूढ़ी औरत रहती थी। उसके पति और बेटे उसे कई साल पहले छोड़कर जा चुके थे। उसका एकमात्र सहारा था उसका पालतू कुत्ता — टॉमी। टॉमी कोई बेशकीमती नस्ल का नहीं था, बस एक सीधा-सादा देसी कुत्ता, जिसे कमला ने बारिश के एक तूफानी दिन झाड़ियों से निकाल कर गोद लिया था। टॉमी और कमला की जिंदगी एक-दूसरे के इर्द-गिर्द ही घूमती थी। वह कमला के साथ मंदिर जाता, सब्जी लेने जाता और रात में उसके पैरों के पास लेटकर सोता। गाँव के लोग अक्सर कहते, “टॉमी तो बूढ़ी माई का साया है।” समय बीतता गया और कमला की तबीयत बिगड़ने लगी। एक दिन वह अपने घर के आँगन में गिर पड़ी। टॉमी ने कई बार भौंक कर गाँव वालों को बुलाने की कोशिश की, लेकिन सबने सोचा कि कुत्ता यूँ ही भौंक रहा है। टॉमी वापस आया, कमला के पास लेट गया, और पूरी रात वहीं बैठा रहा। अगली सुबह जब दूधवाला आया, तब कमला को बेहोश पाया गया। उसे अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने कहा — “बहुत देर हो गई है।” कमला का कुछ ही घंटों में निधन हो गया। कमला की चिता जब श्मशान ले जाई गई, टॉमी पूरे रास्ते ...